Wednesday, December 15, 2010

धन कमाने का तंत्र

धन कमाने के लिये दो और कारकों की जरूरत पडती है,एक तो साधन और दूसरा साधनों को प्रयोग में लायी जाने वाली जानकारी। तीनों कारकों के इकट्ठा हुये बिना धन की बढोत्तरी नही हो सकती है। जैसे कम्पयूटर साधन है तो उसे चलाने की कला जानकारी मानी जायेगी,कम्पयूटर पर बनाये जाने वाले प्रोग्राम ही धन के रूप में माने जायेंगे। अक्सर मन में विचार आने लगते है कि बहुत मेहनत की और मेहनत करने के बाद भी धन नही आया,चित्त में खिन्नता बढ जाती है और जो भी कार्य आगे किया जाता है उसके अन्दर भी चित्त की खिन्नता दिक्कत देती है कार्य से मन दूर हो जाता है,और जब कार्य का मूल्यांकन किया जाता है तो घटिया कार्य की बजह से धन की प्राप्ति नही होती है। जब एक मुशीबत आती है तो दूसरी भी पीछे से अपना असर देने लगती है.घरबार और जीवन के चलाने के लिये रोजाना की जरूरते भी पूरी करनी पडती है,इन जरूरतों को पूरा करने के लिये लोगों से सहायता के रूप में या अपने फ़ायनेन्स से सहायता करने वाले के आगे हाथ फ़ैलाना पडता है जब उसका भी समय पर नही पहुंचता है तो वह भी दरवाजे पर अपनी वसूली वाली नियत से आने लगता है,चित्त की खिन्नता और कार्य की कमी के कारण वह मांगने वाला भी काल जैसा लगने लगता है और कई लोग मांगने वाले से पीछा छुडाने के लिये कई बहाने बनाने चालू कर देते है,उन बहानों को बनाने के बाद जो मांगने आया था उसे कोई संतुष्टि वाला जबाब नही मिलने के कारण वह भी अपने अपने अनुसार हावी होने की कोशिश करने लगता है। यह सब एक साथ होने के कारण या तो रहने वाले स्थान को छोडने का मन करता है या फ़िर किसी प्रकार की चालाकी आदि करने के बाद और धन को कहीं से प्राप्त करने के बाद चुकाने का जी करता है,इसी बात के लिये जो आजकल बैंक आदि में खाते खोले जाते है उनके द्वारा मिलने वाले चैक आदि का प्रयोग करने के बाद लोगों से धन लिया जाता है,और चैक के साथ बन्धक पत्र या सम्पत्ति को रख दिया जाता है,भारतीय जलवायु से भी समय पर चुकाने में दिक्कत आती है,जो कार्य गर्मियों में चला करते है वे सर्दी और बरसात के असर से बन्द हो जाते है और जो कार्य सर्दी में चला करते है वे गर्मी और बरसात में बन्द हो जाते है जो भी धन उधार लिया जाता है वह समय की चलती आवक के अनुसार ही लिया जाता है और जब समय पर धन नही चुकाया जाता है तो दोहरी मार एक तो ब्याज की और दूसरी वसूली करने वाले की बदसलूकी की दिमाग को परेशान करके रख देती है,बिना किसी कारण के चुकाने की तारीख दे दी जाती है और चुकाने का दिन आने से पहले ही दिमाग खराब होना शुरु हो जाता है,रात की नींद और दिन का चैन भी खराब हो जाता है,भूख प्यास सभी बन्द हो जाती है दिल डूब सा जाता है घर परिवार की चिन्ता तो दूर की बात अपनी ही चिन्ता नही रहती है। इन सब कारणों से धन की आवक में कमी तो होती ही है अपनी बनी बनायी साख और घर परिवार की इज्जत की चिन्ता भी दिक्कत देने वाली होती है जो लोग पहले से जानते होते है उनके डर से कि कभी उनके सामने अपना रुतबा दिखाया होता है वे भी रोजाना की बदलती हुयी जिन्दगी को देखकर दूर से ही कमेन्ट पास किया करते है,यह सब केवल जीवन को और नीचे ले जाने वाली बात ही मानी जाती है।

1 comment:

  1. Karj yane jiteji narak / Guruji, karj lenese jo sthiti utpann hoti hai uska ekdam sahi vivaran kiya hai/ lekin isse chhutkara paneka kuchto upaay batayiyena/ mera karj to itna kam hai ke mai mar jata hu to meri antya vidhi me utna kharcha karenge / lekin mere jite ji koyi sahayta nahi kar raha hai / ya mai khud bhi kuch kar nahi pata hu / kisi ke samne hath failaneki aadat nahi hai/ aur kisise udhar le bhi lu to wapas kaise karuga is liye udhar bhi nahi le sakta/ aur itne thode karjke karan mar bhi nahi sakta/ sach Guruji mai jindagi me safal ho gaya to jo log achhe hai aur achanak kisi karanse amir se garib ho gaye hai/ unki sahayta ke liye ek trust banauga/ garib ya bhikhariyonko to madat milti hai ya ve mangbhi lete hai/ lekin amir pe jab musibat aati hai to wah mang bhi nahi sakta/ Gujrat me bhukamp aaya tha to aaju baju ke garib ya bhikhari aake madat le gaye / lekin jo amir th unko to hath failane ki aadat nahi thi unka to bahut hi bura hal huwa/

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